Sadhak Sanjivani / साधक संजीवनी
Pradeep S Rathi
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Chapter 1, Shloka 24,25,26,27 / अध्याय १ - श्लोक 34,35,36
आचार्याः पितरः पुत्रास्तथैव च पितामहाः। मातुलाः श्वशुराः पौत्राः श्यालाः सम्बन्धिनस्तथा।।1.34।।एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन। अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते।।1.35।।आचार्य, पिता,…
Chapter 1, Shloka 28,29,30,31,32,33 / अध्याय १ - श्लोक 28,29,30,31,32,33
अर्जुन उवाचदृष्ट्वेमं स्वजनं कृष्ण युयुत्सुं समुपस्थितम्।।1.28।।सीदन्ति मम गात्राणि मुखं च परिशुष्यति।वेपथुश्च शरीरे मे रोमहर्षश्च जायते।।1.29।।गाण्डीवं स्रंसते हस्तात्त्वक्चैव परिदह्यते।न च…
Chapter 1, Shloka 24,25,26,27 / अध्याय १ - श्लोक 24,25,26,27
संजय उवाचएवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत।सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्।।1.24।।1.24।। व्याख्या--'गुडाकेशेन'--'गुडाकेश' शब्दके दो अर्थ होते हैं (1) 'गुडा' नाम मुड़े हुएका है और 'केश' नाम…
Chapter 1, Shloka 20,21,22,23 / अध्याय १ - श्लोक 20,21,22,23
अथ व्यवस्थितान् दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः।प्रवृत्ते शस्त्रसंपाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः।।1.20।।हृषीकेशं तदा वाक्यमिदमाह महीपते।हे महीपते! धृतराष्ट्र! अब शस्त्रों के चलने की तैयारी हो ही रही थी कि…
Chapter 1, Shloka 15,16,17,18,19 / अध्याय १ - श्लोक 15,16,17,18,19
पाञ्चजन्यं हृषीकेशो देवदत्तं धनंजयः।पौण्ड्रं दध्मौ महाशङ्खं भीमकर्मा वृकोदरः।।1.15।।अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्ण ने पाञ्चजन्य नामक तथा धनञ्जय अर्जुन ने देवदत्त नामक शंख बजाया; और भयानक कर्म करनेवाले…
Chapter 1, Shloka 12,13,14 / अध्याय १ - श्लोक 12,13,14
तस्य संजनयन्हर्षं कुरुवृद्धः पितामहः।सिंहनादं विनद्योच्चैः शङ्खं दध्मौ प्रतापवान्।।1.12।।दुर्योधन के हृदय में हर्ष उत्पन्न करते हुए कुरुवृद्ध प्रभावशाली पितामह भीष्म ने सिंह के समान गरज कर जोर से शंख…
Chapter 1, Shloka 9,10,11 / अध्याय १ - श्लोक 9,10,11
अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्तजीविताः।नानाशस्त्रप्रहरणाः सर्वे युद्धविशारदाः।।1.9।।व्याख्या-- 'अन्ये च बहवः शूरा मदर्थे त्यक्त-जीविताः'-- मैंने अभीतक अपनी सेनाके जितने शूरवीरोंके नाम लिये हैं, उनके…
Chapter 1, Shloka 7,8 / अध्याय १ - श्लोक 7,8
अस्माकं तु विशिष्टा ये तान्निबोध द्विजोत्तम।नायका मम सैन्यस्य संज्ञार्थं तान्ब्रवीमि ते।।1.7।।भवान्भीष्मश्च कर्णश्च कृपश्च समितिञ्जयः।अश्वत्थामा विकर्णश्च सौमदत्तिस्तथैव च।।1.8।।
Chapter 1, Shloka 4,5,6 / अध्याय १ - श्लोक 4,5,6
अत्र शूरा महेष्वासा भीमार्जुनसमा युधि।युयुधानो विराटश्च द्रुपदश्च महारथः।।1.4।।धृष्टकेतुश्चेकितानः काशिराजश्च वीर्यवान्।पुरुजित्कुन्तिभोजश्च शैब्यश्च नरपुङ्गवः।।1.5।।युधामन्युश्च विक्रान्त…
Chapter 1 - Shloka 2 & 3 / अध्याय 1 - श्लोक २ एवं ३
सञ्जय उवाच दृष्ट्वा तु पाण्डवानीकं व्यूढं दुर्योधनस्तदा। आचार्यमुपसङ्गम्य राजा वचनमब्रवीत् ।। 1.2 ।। पश्यैतां पाण्डुपुत्राणामाचार्य महतीं चमूम्। व्यूढां द्रुपदपुत्रेण तव शिष्येण धीमता ।। 1.3 ।।
Chapter 1 - Shloka 1 / अध्याय १ - श्लोक १
धृतराष्ट्र उवाच धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्चैव किमकुर्वत सञ्जय ।। 1.1 ।।
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Sadhak Sanjivani / साधक संजीवनी has published 11 episodes since December 2020, covering topics in Religion & Spirituality.
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